शक्ति की राजनीति में गबेल समाज का निर्णायक उदय: राठौर-साहू गढ़ में बदल रहे समीकरण


छत्तीसगढ़ के नवगठित शक्ति जिले और विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ आया है। दशकों से राठौर और साहू समाज के दबदबे वाले इस क्षेत्र में अब सामाजिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में हुई संगठनात्मक नियुक्तियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गबेल समाज अब यहां एक नई और उभरती हुई राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने इस समुदाय को सर्वोच्च संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपकर, भविष्य की चुनावी रणनीति की आधारशिला रख दी है।
शक्ति की राजनीतिक दिशा को बदलने वाले इस घटनाक्रम की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने की, जब उन्होंने टिकेश्वर गबेल को शक्ति भाजपा जिला अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। यह नियुक्ति पारंपरिक समीकरणों को चुनौती देने वाला पहला कदम था।
इसके जवाब में, कांग्रेस पार्टी ने तो मानो इस नए सामाजिक संतुलन को साधने की ठान ली। कांग्रेस ने लगातार दो बड़े पद गबेल समाज को दिए। पहले सादेश्वर गबेल को किसान जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया, और उसके बाद रश्मि गबेल को जिला कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई।
राजनीतिक विश्लेषक इन नियुक्तियों को एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखते हैं: अब शक्ति की राजनीति केवल पारंपरिक बाहुल्य वर्गों के इर्द-गिर्द नहीं घूमेगी। गबेल समाज का बढ़ता प्रभाव जिले की चुनावी गणित में अब एक ‘निर्णायक वोट बैंक’ का दर्जा हासिल कर रहा है। दलों की यह रणनीति आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिसका उद्देश्य नए और उभरते सामाजिक वर्गों को अपने पाले में लाना है।
शक्ति क्षेत्र की राजनीति का केंद्र रहे राठौर और साहू समाज के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। स्थानीय राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, संगठनात्मक नियुक्तियों में बदलाव कई प्रमुख कारकों का परिणाम है। सबसे पहले, नए और अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों में राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व की आकांक्षा में वृद्धि हुई है, जिसे ‘सामाजिक चेतना’ का उभार कहा जा सकता है। दूसरे, पारंपरिक बाहुल्य समुदायों (राठौर और साहू) में आंतरिक प्रतिस्पर्धा या वोटों के बिखराव की आशंका के चलते दलों को एक नए और एकजुट समुदाय की ओर रुख करना पड़ा है। तीसरा, गबेल समाज में युवा और मुखर नेतृत्व तेजी से उभरा है, जिसे दल अब नजरअंदाज नहीं कर सकते।
एक स्थानीय राजनीतिक पर्यवेक्षक ने बताया, “यह सिर्फ एक जाति का उत्थान नहीं है, बल्कि यह जिला बनने के बाद की पहली राजनीतिक पुनर्संरचना है। अब किसी भी चुनाव में जीत-हार का अंतर तय करने में गबेल समाज की भूमिका अपरिहार्य हो चुकी है।”
गबेल समाज के बढ़ते प्रभाव के साथ ही, शक्ति की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है—आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) समुदाय का संगठनात्मक प्रतिनिधित्व।
यह उल्लेखनीय है कि शक्ति विधानसभा क्षेत्र की तीन जिला पंचायत सीटों में से दो सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। यह आरक्षण उन्हें प्रशासनिक और पंचायती राज व्यवस्था में प्रतिनिधित्व तो सुनिश्चित करता है, लेकिन दलों की संगठनात्मक संरचना में उन्हें वह स्थान नहीं मिल पाया है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जब जिला पंचायत में दो-तिहाई सीटें आदिवासी वर्ग के लिए सुरक्षित हैं, तो उनकी संगठनात्मक हिस्सेदारी, विशेषकर प्रमुख जिला स्तरीय पदों पर, उतनी मजबूत क्यों नहीं दिखाई देती।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विरोधाभास को दूर करना दोनों प्रमुख दलों के लिए भविष्य की बड़ी चुनौती होगी। आदिवासी समुदाय न केवल आरक्षित सीटों पर निर्णायक है, बल्कि उनकी संगठनात्मक भागीदारी ही पार्टियों के जनाधार की गहराई को दर्शाती है। यदि दल इस समुदाय को संगठनात्मक रूप से सशक्त नहीं करते, तो आरक्षित सीटों पर जीत सुनिश्चित करने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
शक्ति जिले में राजनीतिक दलों की रणनीति में यह परिवर्तन एक बड़े सामाजिक मंथन का परिणाम है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने यह भांप लिया है कि अब चुनावी गणित को केवल पारंपरिक समीकरणों से नहीं जीता जा सकता। उन्होंने रणनीतिक रूप से उन समुदायों को आगे बढ़ाया है जो अब तक किनारे थे, ताकि एक व्यापक गठबंधन बनाया जा सके।
आने वाले समय में, शक्ति की राजनीति तीन प्रमुख धुरियों पर केंद्रित रहने की संभावना है: गबेल समाज एक निर्णायक राजनीतिक और संगठनात्मक शक्ति के रूप में, राठौर-साहू समाज अपने पारंपरिक प्रभाव को बनाए रखने की चुनौती के साथ, और आदिवासी समुदाय आरक्षण के अनुपात में संगठनात्मक प्रतिनिधित्व हासिल करने की मांग के साथ।
यह स्पष्ट है कि शक्ति जिले की राजनीति एक नई दिशा में अग्रसर है, जहां सामाजिक जागरूकता और रणनीतिक नियुक्तियां ही सत्ता की कुंजी निर्धारित करेंगी।


